दिल्ली में गाड़ी खरीदने वाले हर इंसान के लिए अप्रैल 2026 एक बड़ा महीना साबित हो रहा है। दिल्ली सरकार ने 11 अप्रैल 2026 को Draft Delhi EV Policy 2026-2030 जारी किया — और इसमें जो कुछ लिखा है, वो हर आम दिल्लीवाले की जेब और ज़िंदगी दोनों पर सीधा असर डालता है।
चाहे आप एक दोपहिया वाहन चलाते हों, ऑटो रिक्शा का व्यवसाय करते हों, या नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने का सपना देख रहे हों — यह नीति आपके लिए है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि यह नीति असल में क्या है, पुरानी नीति से यह कैसे अलग है, इसे क्यों लाया गया, इससे आपको क्या-क्या फ़ायदे मिलेंगे, और सबसे ज़रूरी — कब से क्या लागू होगा।
Delhi government’s new EV policy 2026 introduces subsidies, tax benefits, and mandatory EV adoption timeline
दिल्ली EV Policy 2026 का Core Idea क्या है?
सीधे शब्दों में कहें तो दिल्ली सरकार चाहती है कि 2030 तक दिल्ली की सड़कों पर पेट्रोल-डीज़ल गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन ले लें।
यह नीति सिर्फ सब्सिडी देने के बारे में नहीं है। यह एक पूरा रोडमैप है जिसमें तीन मुख्य स्तंभ हैं:
पहला — आर्थिक प्रोत्साहन: सरकार आपको EV खरीदने पर सीधे पैसे देगी, रोड टैक्स माफ़ करेगी, और पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने पर भी इनाम देगी।
दूसरा — अनिवार्य बदलाव: कुछ तय तारीखों के बाद दिल्ली में पेट्रोल के तिपहिया और दोपहिया वाहनों का नया रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा।
तीसरा — इंफ्रास्ट्रक्चर: चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग का पूरा तंत्र खड़ा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस नीति को जारी करते हुए कहा: "यह नीति दिल्ली में एक स्वच्छ, सुलभ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
पुरानी Delhi EV Policy (2020) और नई Policy 2026 में क्या फ़र्क है?
यह सवाल सबसे ज़रूरी है। बहुत से लोग सोचते हैं — "यह नई नीति आई क्यों? पुरानी वाली तो चल रही थी।" जवाब समझने के लिए दोनों नीतियों को एक-दूसरे के सामने रखते हैं।
दिल्ली EV Policy 2020 — क्या था?
अगस्त 2020 में, तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली की पहली EV नीति लागू की थी। इसका लक्ष्य था कि 2024 तक दिल्ली में बिकने वाली हर 4 में से 1 गाड़ी इलेक्ट्रिक हो — यानी 25% EV बिक्री हिस्सेदारी।
इस नीति में था:
दोपहिया EV पर सब्सिडी
रोड टैक्स में छूट
"Switch Delhi" जागरूकता अभियान
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का वादा
यह नीति मूलत: 3 साल (2023 तक) के लिए थी, लेकिन इसे कई बार बढ़ाया गया। मार्च 2026 तक इसे एक्सटेंड किया जाता रहा।
क्या हासिल हुआ? 2020 से अब तक दिल्ली में 86,000 से अधिक EVs रजिस्टर हुए। 2025 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में नई गाड़ियों में EV की हिस्सेदारी लगभग 14% तक पहुँची — जो राष्ट्रीय औसत 8% से काफी बेहतर है, लेकिन 25% के लक्ष्य से काफी कम।
Comparison of old and new Delhi EV policies highlighting major changes and EV adoption rules
नई Delhi EV Policy 2026 — क्या बदला?
विषय
पुरानी नीति (2020)
नई नीति (2026-2030)
दृष्टिकोण
प्रोत्साहन-आधारित (Incentive-led)
अनिवार्यता + प्रोत्साहन (Mandate + Incentive)
लक्ष्य
25% EV बिक्री by 2024
Mandatory EV registration (3-wheelers 2027, 2-wheelers 2028)
बजट
सीमित
₹3,954.25 करोड़
रोड टैक्स छूट
सभी EVs पर
₹30 लाख तक के EVs पर 100% छूट
स्क्रैपेज इंसेंटिव
सीमित
₹10,000 से ₹1,00,000 तक
स्कूल बस
कोई प्रावधान नहीं
2030 तक 30% इलेक्ट्रिक
सरकारी बेड़ा
कोई सख्त नियम नहीं
सभी सरकारी वाहन electric अनिवार्य
बैटरी रीसाइक्लिंग
कोई प्रावधान नहीं
विस्तृत EPR नियम
DBT (Direct Benefit Transfer)
मुश्किल प्रक्रिया
सीधे बैंक खाते में
सबसे बड़ा फ़र्क: पुरानी नीति "खरीदो तो लाभ मिलेगा" वाली थी। नई नीति कह रही है — "एक तय तारीख के बाद पेट्रोल वाला वाहन रजिस्टर ही नहीं होगा।" यह shift incentive से mandate की ओर है, जो इसे असली मायनों में game-changer बनाता है।
दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली के कुल वायु प्रदूषण में लगभग 23% का योगदान करता है। दोपहिया वाहन, जो दिल्ली के कुल वाहन बेड़े का करीब 67% हैं, इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।
2. पुरानी नीति का लक्ष्य अधूरा रहा
2024 तक 25% EV का लक्ष्य हासिल नहीं हुआ। केवल 13-14% तक ही पहुँचा जा सका। इसलिए नई सरकार ने ज़्यादा कड़े और समयबद्ध उपाय अपनाने का फैसला किया।
3. EV बाज़ार अब परिपक्व है
2020 में भारत में EV विकल्प बेहद सीमित थे। अब 2026 में Tata, Mahindra, MG, BYD जैसी कंपनियाँ किफ़ायती और भरोसेमंद EVs पेश कर रही हैं। FY2026 में भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में लगभग 84% की वृद्धि हुई। यानी बाज़ार तैयार है, बस नीतिगत धक्के की ज़रूरत थी।
4. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अब पहले से बेहतर
2020 में दिल्ली में चंद सौ चार्जिंग पॉइंट थे। 2026 की शुरुआत तक यह संख्या 9,000 तक पहुँच चुकी है। नीति के तहत इसे 30,000 तक ले जाने का लक्ष्य है।
Delhi EV Policy 2026 में क्या-क्या है? — पूरा विवरण
💰 खरीद सब्सिडी (Purchase Incentives)
इलेक्ट्रिक दोपहिया (E-2 Wheeler): केवल उन्हें मिलेगी जिनकी ex-factory कीमत ₹2.25 लाख तक हो।
पहले साल: ₹10,000 प्रति kWh (अधिकतम ₹30,000)
दूसरे साल: ₹6,600 प्रति kWh (अधिकतम ₹20,000)
तीसरे साल: ₹3,300 प्रति kWh (अधिकतम ₹10,000)
इलेक्ट्रिक तिपहिया (E-3 Wheeler / E-Auto):
पहले साल: ₹50,000
दूसरे साल: ₹40,000
तीसरे साल: ₹30,000
इलेक्ट्रिक कार (Non-Transport, up to ₹30 lakh):
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100% छूट (31 मार्च 2030 तक)
₹30 लाख से अधिक कीमत वाले EVs को कोई टैक्स छूट नहीं
Strong Hybrid वाहन (₹30 लाख तक):
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में 50% छूट
इलेक्ट्रिक माल वाहन (N1 Goods Vehicle):
पहले साल तक ₹1 लाख तक इंसेंटिव
Complete breakdown of Delhi EV Policy 2026 including incentives, scrappage, and EV infrastructure
स्क्रैपेज इंसेंटिव (Scrappage Incentives)
पुरानी BS-IV या उससे पुरानी गाड़ी को Authorised Scrapping Centre पर स्क्रैप करने और नई EV खरीदने पर:
दोपहिया: ₹10,000
तिपहिया: ₹25,000
कार (₹30 लाख तक): ₹1,00,000
N1 माल वाहन: ₹50,000
ज़रूरी शर्त: Certificate of Deposit (CoD) मिलने के 6 महीने के अंदर नई EV खरीदनी होगी। पहले 1 लाख आवेदकों को यह लाभ मिलेगा।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
Delhi Transco Limited इसकी नोडल एजेंसी होगी
दिल्ली में हर 3 किलोमीटर के दायरे में एक चार्जिंग सुविधा का लक्ष्य
30,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य
Battery Swapping Stations को विशेष सहायता
नई इमारतों में 20% पार्किंग स्थानों पर EV चार्जिंग कंड्यूट अनिवार्य
एक Digital Portal से अनुमोदन और निगरानी
सार्वजनिक और संस्थागत वाहन
स्कूल बसें: दूसरे साल के अंत तक 10%, तीसरे साल तक 20%, और मार्च 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य
दिल्ली परिवहन निगम: सभी नई inter-state buses electric होंगी
सरकारी वाहन: नीति लागू होने के बाद दिल्ली सरकार के सभी किराए/पट्टे पर लिए गए वाहन electric होंगे
बैटरी रीसाइक्लिंग (पहली बार)
यह पहली बार है जब दिल्ली की EV नीति में बैटरी कचरे के प्रबंधन का स्पष्ट प्रावधान है। Battery Waste Management Rules 2022 के तहत OEM और अन्य जिम्मेदार संस्थाओं को सख्ती से रिपोर्टिंग और रीसाइक्लिंग करनी होगी। DPCC (Delhi Pollution Control Committee) Public-Private Partnership के माध्यम से Battery Collection Centres स्थापित करेगी।
Implementation Timeline — कब से क्या होगा?
यह वह हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा मायने रखता है। नीति की सभी तारीखें यहाँ एक जगह:
तारीख
क्या होगा
जनवरी 2026 से (पहले से लागू)
Fleet Aggregators नए पेट्रोल/डीज़ल 2-Wheeler और LGV को अपने बेड़े में नहीं जोड़ सकते
11 अप्रैल 2026
Draft Policy सार्वजनिक की गई, 30 दिन की Public Feedback Window खुली
नीति लागू होने की तारीख से Purchase Incentives और Tax Exemptions शुरू
1 जनवरी 2027
दिल्ली में केवल Electric 3-Wheeler का नया रजिस्ट्रेशन होगा
1 अप्रैल 2028
दिल्ली में केवल Electric 2-Wheeler का नया रजिस्ट्रेशन होगा
2027 तक (2nd Year End)
स्कूल बसों का 10% electrification
2028 तक (3rd Year End)
स्कूल बसों का 20% electrification
31 मार्च 2030
पूरी नीति की समय-सीमा। 30% स्कूल बसें electric। रोड टैक्स छूट समाप्त।
ध्यान दें: Policy की notification तिथि अभी तय नहीं है। 10 मई 2026 तक public feedback आने के बाद final notification जारी होगी। जब तक यह नहीं होती, draft policy है।
Important timeline of Delhi EV Policy including EV registration deadlines and implementation phases
तत्काल फ़ायदे — अभी क्या मिलेगा?
नीति officially लागू होते ही जो फ़ायदे तुरंत मिलने शुरू होंगे:
1. रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में भारी बचत: दिल्ली में ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कार पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन मिलाकर ₹1.5 लाख से ₹3 लाख तक खर्च आता था। नई नीति में यह पूरी तरह माफ़। इसका मतलब है कि Tata Nexon EV, Tata Punch EV, MG Windsor EV, Mahindra BE 6 जैसी गाड़ियाँ अचानक बहुत किफ़ायती हो जाएंगी।
2. दोपहिया खरीदारों को सीधे बैंक खाते में पैसे: DBT (Direct Benefit Transfer) के ज़रिए सब्सिडी सीधे आपके बैंक अकाउंट में आएगी — बिना दुकानदार के चक्कर लगाए।
3. e-Auto चालकों को बड़ा मौका: ₹50,000 की purchase incentive + ₹25,000 की scrappage incentive = कुल ₹75,000 तक की बचत। जो चालक CNG auto से switch करना चाह रहे हैं, उनके लिए यह बेहद आकर्षक है।
4. Fleet Operators के लिए स्पष्ट संकेत: Ola, Uber, Rapido और delivery companies को नया पेट्रोल वाहन नहीं जोड़ना है (यह January 2026 से ही लागू है)। यानी EV की माँग commercial sector में अभी से तेज़ होगी।
दीर्घकालिक फ़ायदे — आने वाले सालों में क्या बदलेगा?
आम नागरिक के लिए
साफ हवा: वाहनों से होने वाले प्रदूषण में बड़ी गिरावट आएगी। जो लोग respiratory problems से जूझते हैं उनके लिए यह सबसे बड़ा benefit है।
कम रखरखाव खर्च: Electric वाहन में इंजन ऑयल, clutch, carburetor जैसी कोई चीज़ नहीं। लंबे समय में maintenance काफी कम हो जाती है।
ईंधन बचत: CNG auto के मुकाबले e-auto चलाने की प्रति km लागत काफी कम है। रोज़ चलाने वाले चालकों के लिए यह हर महीने हज़ारों रुपए की बचत बन सकती है।
रोज़गार के नए अवसर
EV ecosystem में चार्जिंग station operators, battery technicians, EV service engineers, और recycling workers की माँग बढ़ेगी। नीति में इसका विशेष उल्लेख है।
शहर के लिए
दिल्ली का लक्ष्य है कि वह EV adoption में वैश्विक स्तर पर अग्रणी शहर बने। 2030 तक अगर यह नीति सफल रही, तो दिल्ली का AQI बेहतर होगा, पर्यटन और व्यवसाय दोनों को लाभ मिलेगा।
Official Announcement — सरकारी घोषणा की पूरी जानकारी
कब: 11 अप्रैल 2026, शनिवार
किसने जारी किया: दिल्ली परिवहन विभाग (Transport Department, GNCTD)
किसने घोषणा की: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
दस्तावेज़ कहाँ उपलब्ध है: Transport Department की आधिकारिक वेबसाइट — transport.delhi.gov.in
यह नीति कागज़ पर बेहद महत्वाकांक्षी और व्यापक है। हम इसके तीन मज़बूत पहलू और तीन सवाल आपके सामने रखते हैं।
✅ क्या अच्छा है:
1. DBT से पारदर्शिता: पुरानी नीति में सब्सिडी पाने में महीनों लग जाते थे। Direct Benefit Transfer से यह प्रक्रिया सरल और तेज़ होगी।
2. Mandate का समावेश: सिर्फ subsidy देने से EV adoption नहीं बढ़ती — यह 2020-2024 ने साबित कर दिया। 2027 और 2028 की hard deadlines industry को अभी से planning करने पर मजबूर करती हैं।
3. Mass Market पर फोकस: ₹30 लाख से अधिक के EVs को कोई लाभ नहीं। सारे incentives common आदमी के लिए हैं। यह एक समझदारी भरा निर्णय है।
⚠️ जिन बातों पर नज़र रखनी होगी:
1. Infrastructure की रफ़्तार: 30,000 चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य बड़ा है। क्या 2028 की deadline से पहले यह पूरा होगा?
2. ₹2.25 लाख की कीमत सीमा: E-2 wheeler subsidy के लिए ₹2.25 लाख की ex-factory limit काफी कम है। कई अच्छे scooter इससे ऊपर हैं।
3. अभी Draft है, Final नहीं: 10 मई 2026 तक feedback आने के बाद final policy आएगी। कुछ प्रावधान बदल भी सकते हैं।
कुल मिलाकर: यह नीति सही दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। अगर implementation ज़मीन पर उतरी तो यह दिल्ली की हवा, अर्थव्यवस्था और आम आदमी — तीनों के लिए फ़ायदेमंद साबित होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या मेरी पुरानी पेट्रोल बाइक बंद हो जाएगी?
नहीं। जो वाहन पहले से रजिस्टर हैं वे चलते रहेंगे। नई policy का असर केवल नए रजिस्ट्रेशन पर है। 2028 के बाद नई पेट्रोल बाइक दिल्ली में रजिस्टर नहीं होगी, लेकिन पुरानी बाइक वैध रहेगी।
क्या Ola S1 या TVS iQube को subsidy मिलेगी?
केवल उन्हें मिलेगी जिनकी ex-factory price ₹2.25 लाख या कम हो। आपको specific model की ex-factory price verify करनी होगी।
Tata Nexon EV पर रोड टैक्स माफ़ होगा?
हाँ। Tata Nexon EV, Punch EV, MG Windsor EV — ये सब ₹30 लाख की सीमा में आते हैं, इसलिए 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन माफ़ होगा।
यह लेख AutoAkhbar.com के Editorial Team द्वारा लिखा गया है। हम ऑटोमोटिव नीतियों, EV तकनीक और Indian Auto Industry को cover करते हैं। इस article में दी गई जानकारी Draft Delhi EV Policy 2026 पर आधारित है जो 11 अप्रैल 2026 को जारी की गई। Final Policy में बदलाव हो सकते हैं।
Shubham Sharma is the founder of AutoAkhbar, where he focuses on delivering accurate, data-driven automotive news, EV insights, and in-depth car analysis. With expertise in digital marketing and SEO, he specialises in building high-authority automotive content platforms.
He actively tracks global EV trends, emerging technologies, and market shifts to provide readers with reliable and up-to-date insights. His goal is to simplify complex automotive topics and help users make informed decisions.
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दिल्ली में गाड़ी खरीदने वाले हर इंसान के लिए अप्रैल 2026 एक बड़ा महीना साबित हो रहा है। दिल्ली सरकार ने 11 अप्रैल 2026 को Draft Delhi EV Policy 2026-2030 जारी किया — और इसमें जो कुछ लिखा है, वो हर आम दिल्लीवाले की जेब और ज़िंदगी दोनों पर सीधा असर डालता है।
चाहे आप एक दोपहिया वाहन चलाते हों, ऑटो रिक्शा का व्यवसाय करते हों, या नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने का सपना देख रहे हों — यह नीति आपके लिए है। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि यह नीति असल में क्या है, पुरानी नीति से यह कैसे अलग है, इसे क्यों लाया गया, इससे आपको क्या-क्या फ़ायदे मिलेंगे, और सबसे ज़रूरी — कब से क्या लागू होगा।
Delhi government’s new EV policy 2026 introduces subsidies, tax benefits, and mandatory EV adoption timeline
दिल्ली EV Policy 2026 का Core Idea क्या है?
सीधे शब्दों में कहें तो दिल्ली सरकार चाहती है कि 2030 तक दिल्ली की सड़कों पर पेट्रोल-डीज़ल गाड़ियों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन ले लें।
यह नीति सिर्फ सब्सिडी देने के बारे में नहीं है। यह एक पूरा रोडमैप है जिसमें तीन मुख्य स्तंभ हैं:
पहला — आर्थिक प्रोत्साहन: सरकार आपको EV खरीदने पर सीधे पैसे देगी, रोड टैक्स माफ़ करेगी, और पुरानी गाड़ी स्क्रैप करने पर भी इनाम देगी।
दूसरा — अनिवार्य बदलाव: कुछ तय तारीखों के बाद दिल्ली में पेट्रोल के तिपहिया और दोपहिया वाहनों का नया रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा।
तीसरा — इंफ्रास्ट्रक्चर: चार्जिंग स्टेशन, बैटरी स्वैपिंग और बैटरी रीसाइक्लिंग का पूरा तंत्र खड़ा किया जाएगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस नीति को जारी करते हुए कहा: "यह नीति दिल्ली में एक स्वच्छ, सुलभ और टिकाऊ परिवहन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
पुरानी Delhi EV Policy (2020) और नई Policy 2026 में क्या फ़र्क है?
यह सवाल सबसे ज़रूरी है। बहुत से लोग सोचते हैं — "यह नई नीति आई क्यों? पुरानी वाली तो चल रही थी।" जवाब समझने के लिए दोनों नीतियों को एक-दूसरे के सामने रखते हैं।
दिल्ली EV Policy 2020 — क्या था?
अगस्त 2020 में, तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली की पहली EV नीति लागू की थी। इसका लक्ष्य था कि 2024 तक दिल्ली में बिकने वाली हर 4 में से 1 गाड़ी इलेक्ट्रिक हो — यानी 25% EV बिक्री हिस्सेदारी।
इस नीति में था:
दोपहिया EV पर सब्सिडी
रोड टैक्स में छूट
"Switch Delhi" जागरूकता अभियान
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का वादा
यह नीति मूलत: 3 साल (2023 तक) के लिए थी, लेकिन इसे कई बार बढ़ाया गया। मार्च 2026 तक इसे एक्सटेंड किया जाता रहा।
क्या हासिल हुआ? 2020 से अब तक दिल्ली में 86,000 से अधिक EVs रजिस्टर हुए। 2025 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में नई गाड़ियों में EV की हिस्सेदारी लगभग 14% तक पहुँची — जो राष्ट्रीय औसत 8% से काफी बेहतर है, लेकिन 25% के लक्ष्य से काफी कम।
Comparison of old and new Delhi EV policies highlighting major changes and EV adoption rules
नई Delhi EV Policy 2026 — क्या बदला?
विषय
पुरानी नीति (2020)
नई नीति (2026-2030)
दृष्टिकोण
प्रोत्साहन-आधारित (Incentive-led)
अनिवार्यता + प्रोत्साहन (Mandate + Incentive)
लक्ष्य
25% EV बिक्री by 2024
Mandatory EV registration (3-wheelers 2027, 2-wheelers 2028)
बजट
सीमित
₹3,954.25 करोड़
रोड टैक्स छूट
सभी EVs पर
₹30 लाख तक के EVs पर 100% छूट
स्क्रैपेज इंसेंटिव
सीमित
₹10,000 से ₹1,00,000 तक
स्कूल बस
कोई प्रावधान नहीं
2030 तक 30% इलेक्ट्रिक
सरकारी बेड़ा
कोई सख्त नियम नहीं
सभी सरकारी वाहन electric अनिवार्य
बैटरी रीसाइक्लिंग
कोई प्रावधान नहीं
विस्तृत EPR नियम
DBT (Direct Benefit Transfer)
मुश्किल प्रक्रिया
सीधे बैंक खाते में
सबसे बड़ा फ़र्क: पुरानी नीति "खरीदो तो लाभ मिलेगा" वाली थी। नई नीति कह रही है — "एक तय तारीख के बाद पेट्रोल वाला वाहन रजिस्टर ही नहीं होगा।" यह shift incentive से mandate की ओर है, जो इसे असली मायनों में game-changer बनाता है।
दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार है। वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली के कुल वायु प्रदूषण में लगभग 23% का योगदान करता है। दोपहिया वाहन, जो दिल्ली के कुल वाहन बेड़े का करीब 67% हैं, इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।
2. पुरानी नीति का लक्ष्य अधूरा रहा
2024 तक 25% EV का लक्ष्य हासिल नहीं हुआ। केवल 13-14% तक ही पहुँचा जा सका। इसलिए नई सरकार ने ज़्यादा कड़े और समयबद्ध उपाय अपनाने का फैसला किया।
3. EV बाज़ार अब परिपक्व है
2020 में भारत में EV विकल्प बेहद सीमित थे। अब 2026 में Tata, Mahindra, MG, BYD जैसी कंपनियाँ किफ़ायती और भरोसेमंद EVs पेश कर रही हैं। FY2026 में भारत में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में लगभग 84% की वृद्धि हुई। यानी बाज़ार तैयार है, बस नीतिगत धक्के की ज़रूरत थी।
4. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर अब पहले से बेहतर
2020 में दिल्ली में चंद सौ चार्जिंग पॉइंट थे। 2026 की शुरुआत तक यह संख्या 9,000 तक पहुँच चुकी है। नीति के तहत इसे 30,000 तक ले जाने का लक्ष्य है।
Delhi EV Policy 2026 में क्या-क्या है? — पूरा विवरण
💰 खरीद सब्सिडी (Purchase Incentives)
इलेक्ट्रिक दोपहिया (E-2 Wheeler): केवल उन्हें मिलेगी जिनकी ex-factory कीमत ₹2.25 लाख तक हो।
पहले साल: ₹10,000 प्रति kWh (अधिकतम ₹30,000)
दूसरे साल: ₹6,600 प्रति kWh (अधिकतम ₹20,000)
तीसरे साल: ₹3,300 प्रति kWh (अधिकतम ₹10,000)
इलेक्ट्रिक तिपहिया (E-3 Wheeler / E-Auto):
पहले साल: ₹50,000
दूसरे साल: ₹40,000
तीसरे साल: ₹30,000
इलेक्ट्रिक कार (Non-Transport, up to ₹30 lakh):
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100% छूट (31 मार्च 2030 तक)
₹30 लाख से अधिक कीमत वाले EVs को कोई टैक्स छूट नहीं
Strong Hybrid वाहन (₹30 लाख तक):
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में 50% छूट
इलेक्ट्रिक माल वाहन (N1 Goods Vehicle):
पहले साल तक ₹1 लाख तक इंसेंटिव
Complete breakdown of Delhi EV Policy 2026 including incentives, scrappage, and EV infrastructure
स्क्रैपेज इंसेंटिव (Scrappage Incentives)
पुरानी BS-IV या उससे पुरानी गाड़ी को Authorised Scrapping Centre पर स्क्रैप करने और नई EV खरीदने पर:
दोपहिया: ₹10,000
तिपहिया: ₹25,000
कार (₹30 लाख तक): ₹1,00,000
N1 माल वाहन: ₹50,000
ज़रूरी शर्त: Certificate of Deposit (CoD) मिलने के 6 महीने के अंदर नई EV खरीदनी होगी। पहले 1 लाख आवेदकों को यह लाभ मिलेगा।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
Delhi Transco Limited इसकी नोडल एजेंसी होगी
दिल्ली में हर 3 किलोमीटर के दायरे में एक चार्जिंग सुविधा का लक्ष्य
30,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य
Battery Swapping Stations को विशेष सहायता
नई इमारतों में 20% पार्किंग स्थानों पर EV चार्जिंग कंड्यूट अनिवार्य
एक Digital Portal से अनुमोदन और निगरानी
सार्वजनिक और संस्थागत वाहन
स्कूल बसें: दूसरे साल के अंत तक 10%, तीसरे साल तक 20%, और मार्च 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य
दिल्ली परिवहन निगम: सभी नई inter-state buses electric होंगी
सरकारी वाहन: नीति लागू होने के बाद दिल्ली सरकार के सभी किराए/पट्टे पर लिए गए वाहन electric होंगे
बैटरी रीसाइक्लिंग (पहली बार)
यह पहली बार है जब दिल्ली की EV नीति में बैटरी कचरे के प्रबंधन का स्पष्ट प्रावधान है। Battery Waste Management Rules 2022 के तहत OEM और अन्य जिम्मेदार संस्थाओं को सख्ती से रिपोर्टिंग और रीसाइक्लिंग करनी होगी। DPCC (Delhi Pollution Control Committee) Public-Private Partnership के माध्यम से Battery Collection Centres स्थापित करेगी।
Implementation Timeline — कब से क्या होगा?
यह वह हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा मायने रखता है। नीति की सभी तारीखें यहाँ एक जगह:
तारीख
क्या होगा
जनवरी 2026 से (पहले से लागू)
Fleet Aggregators नए पेट्रोल/डीज़ल 2-Wheeler और LGV को अपने बेड़े में नहीं जोड़ सकते
11 अप्रैल 2026
Draft Policy सार्वजनिक की गई, 30 दिन की Public Feedback Window खुली
नीति लागू होने की तारीख से Purchase Incentives और Tax Exemptions शुरू
1 जनवरी 2027
दिल्ली में केवल Electric 3-Wheeler का नया रजिस्ट्रेशन होगा
1 अप्रैल 2028
दिल्ली में केवल Electric 2-Wheeler का नया रजिस्ट्रेशन होगा
2027 तक (2nd Year End)
स्कूल बसों का 10% electrification
2028 तक (3rd Year End)
स्कूल बसों का 20% electrification
31 मार्च 2030
पूरी नीति की समय-सीमा। 30% स्कूल बसें electric। रोड टैक्स छूट समाप्त।
ध्यान दें: Policy की notification तिथि अभी तय नहीं है। 10 मई 2026 तक public feedback आने के बाद final notification जारी होगी। जब तक यह नहीं होती, draft policy है।
Important timeline of Delhi EV Policy including EV registration deadlines and implementation phases
तत्काल फ़ायदे — अभी क्या मिलेगा?
नीति officially लागू होते ही जो फ़ायदे तुरंत मिलने शुरू होंगे:
1. रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन में भारी बचत: दिल्ली में ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कार पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन मिलाकर ₹1.5 लाख से ₹3 लाख तक खर्च आता था। नई नीति में यह पूरी तरह माफ़। इसका मतलब है कि Tata Nexon EV, Tata Punch EV, MG Windsor EV, Mahindra BE 6 जैसी गाड़ियाँ अचानक बहुत किफ़ायती हो जाएंगी।
2. दोपहिया खरीदारों को सीधे बैंक खाते में पैसे: DBT (Direct Benefit Transfer) के ज़रिए सब्सिडी सीधे आपके बैंक अकाउंट में आएगी — बिना दुकानदार के चक्कर लगाए।
3. e-Auto चालकों को बड़ा मौका: ₹50,000 की purchase incentive + ₹25,000 की scrappage incentive = कुल ₹75,000 तक की बचत। जो चालक CNG auto से switch करना चाह रहे हैं, उनके लिए यह बेहद आकर्षक है।
4. Fleet Operators के लिए स्पष्ट संकेत: Ola, Uber, Rapido और delivery companies को नया पेट्रोल वाहन नहीं जोड़ना है (यह January 2026 से ही लागू है)। यानी EV की माँग commercial sector में अभी से तेज़ होगी।
दीर्घकालिक फ़ायदे — आने वाले सालों में क्या बदलेगा?
आम नागरिक के लिए
साफ हवा: वाहनों से होने वाले प्रदूषण में बड़ी गिरावट आएगी। जो लोग respiratory problems से जूझते हैं उनके लिए यह सबसे बड़ा benefit है।
कम रखरखाव खर्च: Electric वाहन में इंजन ऑयल, clutch, carburetor जैसी कोई चीज़ नहीं। लंबे समय में maintenance काफी कम हो जाती है।
ईंधन बचत: CNG auto के मुकाबले e-auto चलाने की प्रति km लागत काफी कम है। रोज़ चलाने वाले चालकों के लिए यह हर महीने हज़ारों रुपए की बचत बन सकती है।
रोज़गार के नए अवसर
EV ecosystem में चार्जिंग station operators, battery technicians, EV service engineers, और recycling workers की माँग बढ़ेगी। नीति में इसका विशेष उल्लेख है।
शहर के लिए
दिल्ली का लक्ष्य है कि वह EV adoption में वैश्विक स्तर पर अग्रणी शहर बने। 2030 तक अगर यह नीति सफल रही, तो दिल्ली का AQI बेहतर होगा, पर्यटन और व्यवसाय दोनों को लाभ मिलेगा।
Official Announcement — सरकारी घोषणा की पूरी जानकारी
कब: 11 अप्रैल 2026, शनिवार
किसने जारी किया: दिल्ली परिवहन विभाग (Transport Department, GNCTD)
किसने घोषणा की: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
दस्तावेज़ कहाँ उपलब्ध है: Transport Department की आधिकारिक वेबसाइट — transport.delhi.gov.in
EV Apex Committee: Transportation Minister की अध्यक्षता में एक High-Level EV Apex Committee नीति के कार्यान्वयन और EV Fund के प्रबंधन की देखरेख करेगी।
EV Fund: बजटीय आवंटन, Environmental Charges और Central Schemes से एक dedicated EV Fund बनाया जाएगा।
₹3,954 करोड़ का बजट — पैसा कहाँ जाएगा?
मद
आवंटन
खरीद प्रोत्साहन (Purchase Incentives)
₹1,236.25 करोड़
स्क्रैपेज प्रोत्साहन (Scrapping Incentives)
₹1,718 करोड़
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
₹1,000 करोड़
कुल
₹3,954.25 करोड़
Year-wise खर्च की योजना:
पहला साल: ₹965.5 करोड़
दूसरा साल: ₹1,012.75 करोड़
तीसरा साल: ₹1,231.5 करोड़
चौथा साल: ₹744.5 करोड़
AutoAkhbar का Verdict — हमारी राय
यह नीति कागज़ पर बेहद महत्वाकांक्षी और व्यापक है। हम इसके तीन मज़बूत पहलू और तीन सवाल आपके सामने रखते हैं।
✅ क्या अच्छा है:
1. DBT से पारदर्शिता: पुरानी नीति में सब्सिडी पाने में महीनों लग जाते थे। Direct Benefit Transfer से यह प्रक्रिया सरल और तेज़ होगी।
2. Mandate का समावेश: सिर्फ subsidy देने से EV adoption नहीं बढ़ती — यह 2020-2024 ने साबित कर दिया। 2027 और 2028 की hard deadlines industry को अभी से planning करने पर मजबूर करती हैं।
3. Mass Market पर फोकस: ₹30 लाख से अधिक के EVs को कोई लाभ नहीं। सारे incentives common आदमी के लिए हैं। यह एक समझदारी भरा निर्णय है।
⚠️ जिन बातों पर नज़र रखनी होगी:
1. Infrastructure की रफ़्तार: 30,000 चार्जिंग स्टेशन का लक्ष्य बड़ा है। क्या 2028 की deadline से पहले यह पूरा होगा?
2. ₹2.25 लाख की कीमत सीमा: E-2 wheeler subsidy के लिए ₹2.25 लाख की ex-factory limit काफी कम है। कई अच्छे scooter इससे ऊपर हैं।
3. अभी Draft है, Final नहीं: 10 मई 2026 तक feedback आने के बाद final policy आएगी। कुछ प्रावधान बदल भी सकते हैं।
कुल मिलाकर: यह नीति सही दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। अगर implementation ज़मीन पर उतरी तो यह दिल्ली की हवा, अर्थव्यवस्था और आम आदमी — तीनों के लिए फ़ायदेमंद साबित होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या मेरी पुरानी पेट्रोल बाइक बंद हो जाएगी?
नहीं। जो वाहन पहले से रजिस्टर हैं वे चलते रहेंगे। नई policy का असर केवल नए रजिस्ट्रेशन पर है। 2028 के बाद नई पेट्रोल बाइक दिल्ली में रजिस्टर नहीं होगी, लेकिन पुरानी बाइक वैध रहेगी।
क्या Ola S1 या TVS iQube को subsidy मिलेगी?
केवल उन्हें मिलेगी जिनकी ex-factory price ₹2.25 लाख या कम हो। आपको specific model की ex-factory price verify करनी होगी।
Tata Nexon EV पर रोड टैक्स माफ़ होगा?
हाँ। Tata Nexon EV, Punch EV, MG Windsor EV — ये सब ₹30 लाख की सीमा में आते हैं, इसलिए 100% रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन माफ़ होगा।
यह लेख AutoAkhbar.com के Editorial Team द्वारा लिखा गया है। हम ऑटोमोटिव नीतियों, EV तकनीक और Indian Auto Industry को cover करते हैं। इस article में दी गई जानकारी Draft Delhi EV Policy 2026 पर आधारित है जो 11 अप्रैल 2026 को जारी की गई। Final Policy में बदलाव हो सकते हैं।
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